Monthly Archives: अक्टूबर 2011

ghazal-chalo utho

चलो उठो इस रोगी समाज को बदलो जो काम आता नहीं उस रिवाज को बदलो हमेशा याद रखो अपना बीता कल लेकिन, नई सुबह के लिये अपने आज को बदलो सुनो नदी ने मुहाना बदल लिया अपना, इसी तरह तुम … पढना जारी रखे

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गजल-आस्था..

आजकल आस्था इतनी बीमार है हर तरफ सिर्फ बाजार,बाजार है भावनायें अगर शुष्क हो जायेंगी, आदमी का न फिर कोई उपचार है हमने पत्थर में भगवान पैदा किया, और इससे बडा क्या चमत्कार है आदमी आज मिलता है इस वेश … पढना जारी रखे

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गीत

उमड-घुमड कर उठेगा बादल हवायें करने लगीं हैं कल-कल हजारों इच्छायें जन्म लेंगी किसी का लहरा उठा है आँचल… यहाँ-वहाँ है इधर-उधर उधर है नजर उठाओ जिधर-जिधर है किसी का सावन किसी का साजन उठा गगन में सवंर-सवंर है किसी … पढना जारी रखे

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जीवन

जीवन आता है जाता है जगजीतने वाला भी जाता है सबसे उसका एक सा नाता है वह नहीं हमें भरमाता है हम भरमाते हैं…..

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कविता-ढोल

हम तो ढोल बजाते हैं लोगों को यूँ नचाते हैं जब तन उनका झूम उठे, मन से हम हर्षाते हैं.. कईं बार तो हम गल्ती करके, दूसरों के सामने शर्माते हैं… सारी उम्र पहाड को तोडते हैं, और इक दिन … पढना जारी रखे

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शेर

छोडिये मत जिन्दगी में रोशनी उम्मीद की जीने की इक आस देती है खुशी उम्मीद की रात के सीने में एक सूरज दिखाई देता है, दाद देता हूँ ऐसी आपकी उम्मीद की…. सुजान

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हमुनसे मिलके

हम उनसे पहली दफा मिलके खिलखिलाये बहुत पर उसके बाद मेरे नैन डबडबाये बहुत हमारी चाह हमें मौत तक ले जाती है, समेट लेने की चाहत ने लूट खाये बहुत नजर तो लौटती है बिन कहे तआकुब में, जिसे न … पढना जारी रखे

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