ghazal-गजल

दर्द को साध कर जला हूँ मैं

इसलिये आज तक भला हूँ मैं

झाँक लो कोई भी मेरे अन्दर,

आसमाँ की तरह खुला हूँ मैं…

देख कर सबको ऐसा लगता है,

हर किसी से कहीं मिला हूँ मैं…

दर्द को साध कर जला हूँ मैं

इसलिये आज तक भला हूँ मैं

झाँक लो कोई भी मेरे अन्दर,

आसमाँ की तरह खुला हूँ मैं…

देख कर सबको ऐसा लगता है,

हर किसी से कहीं मिला हूँ मैं…

मुझको खुद से अलग नहीं समझो,

दर्द को साध कर जला हूँ मैं

इसलिये आज तक भला हूँ मैं

झाँक लो कोई भी मेरे अन्दर,

आसमाँ की तरह खुला हूँ मैं…

देख कर सबको ऐसा लगता है,

हर किसी से कहीं मिला हूँ मैं…

मुझको खुद से अलग नहीं समझो,

तेरे अन्दर मिला-जुला हूँ मैं…

मुझसे नाराज मत हो जाना तुम,

जिन्दगी भर का सिलसिला हूँ मैं…

तुम मेरे साथ-साथ चलते रहो,

आपके दिल का हौंसला हूँ मैं…

जीते जी टूटता नहीं …
तेरे अन्दर मिला-जुला हूँ मैं…

मुझसे नाराज मत हो जाना तुम,

जिन्दगी भर का सिलसिला हूँ मैं…

तुम मेरे साथ-साथ चलते रहो,

आपके दिल का हौंसला हूँ मैं…

जीते जी टूटता नहीं …
मुझको खुद से अलग नहीं समझो,

तेरे अन्दर मिला-जुला हूँ मैं…

मुझसे नाराज मत हो जाना तुम,

जिन्दगी भर का सिलसिला हूँ मैं…

तुम मेरे साथ-साथ चलते रहो,

आपके दिल का हौंसला हूँ मैं…

जीते जी टूटता नहीं …

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About kavisujan

hindi poet- i am write hindi ghazals,kavitatorys etc.
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3 Responses to ghazal-गजल

  1. raaj kumari कहते हैं:

    kya aap meri ghazal pad kar muje feedback dengi?

  2. kavisujan कहते हैं:

    ji, ye aap kah rhi hn ya main kah rha hun………

  3. kavisujan कहते हैं:

    han main bhi feedback dunga aar aap bhi den….thanks

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