Monthly Archives: दिसम्बर 2011

गजल-हालाते जायेजा

अब देखता हूँ कौन है देता दुआ मुझे सच बोलने की कैसी मिलेगी सजा मुझे- पहचानते नहीं मेरे अपने भी वक्त पर, अब इस जमाने से ही उठा ले खुदा मुझे मैंने खरीदी कार जो मन्दिर के पैसों से, सारा … पढना जारी रखे

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भक्ति गीत

जगत पिता हे जगत पिता हे जगत पिता हे जगत पिता हे…. तुम्हीं अंधेरा तुम्हीं उजाला तुम्हीं हो शीतल तुम्हीं ज्वाला चले तुम्हारी तो दिन हो काला ये जग तुम्हारी प्रयोगशाला……. ये धर्म सब तेरे नाम से हैं तेरे लिये … पढना जारी रखे

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गजल

खामोश ना रहें कुछ तो बात हम करें चल एक  दूसरे  से  बात  हम  करें कल जो हमारे बीच था अब वो नहीं रहा, आओ कि उसकी याद में कुछ बात हम करें वो जुल्म जुल्म हैं जो किये जानबूझकर, … पढना जारी रखे

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गजलें

आजकल आस्था इतनी बीमार है हर तरफ सिर्फ बाजार बाजार है भावनायें अगर शुष्क हो जायेंगी, आदमी का न फिर कोई उपचार है आदमी आज मिलता है इस वेश में, हाथ में फूल आँखों में तलवार है एक बेघर को … पढना जारी रखे

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ghazal

पूछता है वो कईं बार किधर जाता है, कहते कहते वो समन्दर में उतर जाता है.. मुझसे हर शाम वो मेरा पता क्यूँ पूछता है, सिलसिला रोज यही है मेरे घर जाता है… आज कुछ भी तो दिखाई नहीं देता … पढना जारी रखे

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गजल

जान कर सब कुछ अनजान बना बैठा हूँ आजकल का एक इन्सान बना बैठा हूँ कौन क्या कर रहा है देख रहा हूँ सब कुछ, सच कहूँ तो मैं भी भगवान बना बैठा हूँ                                     सूबे सिहं सुजान

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