Monthly Archives: सितम्बर 2013

कुछ चने गर्म खा लिये उसने, दाँत अपने तुडा लिये उसने।। इस तरह जिन्दगी बिताता है, दूध, पानी मिला लिये उसने। जब बुढापा करीब आया तो, मूंछ, दाढी बढा लिये उसने।। जिन्दगी मुफ़्लिसी में गुजरी है, पैर सबके दबा लिये … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | टिप्पणी करे

एक क़िता-

जो परख़ लेता है, तो बात नहीं करता फिर। तोड कर रिश्ता मुलाक़ात नहीं करता फिर। जिस बादल की इबादत नहीं करती धरती, ऐसा बादल कभी बरसात नहीं करता फिर।। सूबे सिंह सुजान

गजलें में प्रकाशित किया गया | टिप्पणी करे

एक शेर,

शातिर बडी सफाई से फिर चाल चल गया। वो देखते ही देखते चेहरा बदल गया।। — सुजान

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | टिप्पणी करे

short story–बस की सीट

एक बस जब बस स्टाप पर रूकी और उसमें कुछ यात्री चढे,कुछ उतरे एक सीट पर दो यात्री थे। एक उतरा और एक औरत बैठी रह गई। तभी दूसरा यात्री आया। जैसे ही उसने सीट पर बैठने के लिये औरत … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | टिप्पणी करे