Monthly Archives: अप्रैल 2018

ग़ज़ल, इस तरह पास आ के बैठे हैं

इस तरह पास आ के बैठे हैं वो पहेली बना के बैठे हैं । उनको भी देखना नहीं नाटक हम भी पर्दा गिरा के बैठे हैं हो गई गलती,शर्म भी आयी, इसलिए दूर जा के बैठे हैं झूठ पकड़ा गया … पढना जारी रखे

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और हम , दिल जला के बैठे हैं

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ग़ज़ल के शेर ।सब एक दूसरे में कमी देखते रहे

सब एक दूसरे में कमी देखते रहे लालच में अपनी अपनी खुशी देखते रहे हम रूठे उससे,जिसका किनारा कंही न था हम आसमान भूले,जमीं देखते रहे । कुछ को तो बहते आँसू दिखाई नहीं दिये कुछ खुश्क आँखों में भी … पढना जारी रखे

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