ग़ज़ल के शेर ।सब एक दूसरे में कमी देखते रहे

सब एक दूसरे में कमी देखते रहे
लालच में अपनी अपनी खुशी देखते रहे

हम रूठे उससे,जिसका किनारा कंही न था
हम आसमान भूले,जमीं देखते रहे ।

कुछ को तो बहते आँसू दिखाई नहीं दिये
कुछ खुश्क आँखों में भी नमी देखते रहे ।

सूबे सिंह सुजान

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About kavisujan

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