Monthly Archives: जुलाई 2018

दो शेर

हर बार गया जीत वो झूठा मिरे आगे हर बार गया हार वो सच्चा मिरे आगे सब झिड़कियाँ खामोशी से सह जाते थे बेटे, अब बोल रहा है मेरा बेटा मिरे आगे । सूबे सिंह “सुजान” Advertisements

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | 1 टिप्पणी

शोध आलेख ( कवितालयों की आवश्यकता है)

sujankavi my poetry मेरी गजलें और कवितायें शोध लेख *कवितालयों की आवश्यकता* *कवितालयों की तीव्र आवश्यकता है* जिस तरह अस्पताल व पुलिस स्टेशनो की जरूरत है उसी तरह से समाज को कवि व कविताओं की की जरूरत है। कविता समाज … पढना जारी रखे

Uncategorized में प्रकाशित किया गया | टिप्पणी करे