Category Archives: गजलें

एक क़िता-

जो परख़ लेता है, तो बात नहीं करता फिर। तोड कर रिश्ता मुलाक़ात नहीं करता फिर। जिस बादल की इबादत नहीं करती धरती, ऐसा बादल कभी बरसात नहीं करता फिर।। सूबे सिंह सुजान Advertisements

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ghazal-chalo utho

चलो उठो इस रोगी समाज को बदलो जो काम आता नहीं उस रिवाज को बदलो हमेशा याद रखो अपना बीता कल लेकिन, नई सुबह के लिये अपने आज को बदलो सुनो नदी ने मुहाना बदल लिया अपना, इसी तरह तुम … पढना जारी रखे

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हमुनसे मिलके

हम उनसे पहली दफा मिलके खिलखिलाये बहुत पर उसके बाद मेरे नैन डबडबाये बहुत हमारी चाह हमें मौत तक ले जाती है, समेट लेने की चाहत ने लूट खाये बहुत नजर तो लौटती है बिन कहे तआकुब में, जिसे न … पढना जारी रखे

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